ग़ज़ल : ==== सारे वज़ीर हैं अब, लम्बी ज़बान वाले । राजाओं की न आँखें, वो हैं न कान वाले।। डूबी पड़ी हैं सड़कें , डूबे हैं खेत सारे । अब क्या कहें किसी से, हिंदोस्तान वाले!! इंसान बह गये हैं, सब बह गये मवेशी । सामाँ बचा न पाये, ऊँचे मकान वाले।। नदियों ने ले लिये हैं, खोये हुए किनारे । जायें तो अब कहाँ पर,जायें वितान वाले!! बादल फटा यहांँ पर, दरका पहाड़ अब वो । ख़बरें सुनाने आये, सारे जहान वाले।। सर्वाधिकार सुरक्षित -महेन्द्र प्रकाशी