जुर्म की जब सजा नहीं मिलती , नस्ल में फिर हया नहीं मिलती – निकी पुष्कर

‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक पंजीकृत राष्ट्रीय संस्था

विश्व हिंदी दिवस के पावन अवसर पर काव्य संध्या का भव्य आयोजन

‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक एवं सामाजिक पंजीकृत राष्ट्रीय संस्था द्वारा विश्व हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर एक भावपूर्ण गरिमामयी एवं साहित्यिक काव्य संध्या का सफल आयोजन किया गया।
देहरादून ,
आज का दिन हिंदी भाषा के वैश्विक गौरव, उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन ने हिंदी को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया। तभी से यह दिन विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस ऐतिहासिक परंपरा को सार्थक करते हुए संस्था द्वारा
इस साहित्यिक समारोह का शुभारंभ संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत उद्बोधन के साथ किया गया।
प्रथम सत्र का विधिवत सशक्त संचालन श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ द्वारा तथा द्वितीय सत्र का सुन्दर संचालन श्री कुमार विजय द्रोणी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था की संरक्षिका डॉ. इंदु अग्रवाल ने की। उनके स्नेहिल एवं मार्गदर्शक उद्बोधन ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्री असीम शुक्ल की उपस्थिति रही।
डॉ. राम विनय सिंह, श्री श्रीकांत, श्री जगदीश बावला, श्री जी के पिपिल, शिव मोहन सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
काव्य संध्या को सफल बनाने में साहित्य–प्रेमी सुधीजनों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
डॉ. इंदु अग्रवाल,श्री असीम शुक्ल, डॉ.राम विनय सिंह, श्री शिव मोहन सिंह, श्री जगदीश बावला, मणि अग्रवाल ‘मणिका’, कुमार विजय द्रोणी, सतेंदर शर्मा ‘तरंग’, डॉ. सत्यानंद बडोनी, श्रीकांत श्री जी, महिमा श्री, श्री सुरेश सियाल, जी.के. पिपिल, शिव मोहन सिंह, आर.डी. अग्रवाल, कविता बिष्ट ‘नेह’, विद्यासागर कापड़ी, ममता स्नेहा, स्वाति ‘मौलश्री’, भारती आनंद, वरिष्ठ संपादक एस.पी. दुबे, सनी सक्सेना, शिव चरण शर्मा मुज़्तर,सत्य प्रकाश सत्य जी,डॉ.क्षमा कौशिक, ममता जोशी ‘स्नेहा’, सुमन किमोठी ‘वसुधा’, सिद्धी डोभाल ‘सागरिका’, नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’ संजय प्रधान, दीपाली गर्ग जी, ज्योति, निकी पुष्कर, भारती आनंद,दिलीप सिंह बिष्ट, रखी सिंगहल, सतेंद्र शर्मा तरंग, जया रावत, दिनेश रावत, रुद्र रावत, दीपक बिष्ट जी की पावन उपस्थिति रही।
संस्था के उपाध्यक्ष जी पिपिल जी ने बहुत सुंदर काव्य पाठ से सबका मन मोह लिया उनकी पंक्तियाँ‘तुम चले आना भले हरज़ाई बनकर हम निहारेंगे तुम्हें सौदाई बनकर’ कविता बिष्ट नेह ने ‘सदकाम करो, अभिमान करो, निज भाषा का गुणगान करो’ सिद्धि डोभाल जी ने ‘भॅंवर के बीच यादों की ,सुहानी भोर है।’भारती आनंद ‘अनंता’आयी’बड़े खामोश चेहरे हैं ये तेरे हैं या मेरे हैं निकीपुष्कर ‘जुर्म की जब सजा नहीं मिलती’नस्ल में फिर हया नहीं मिलती। मणि अग्रवाल मणिका ने वर्तमान जीवन शैली पर सुंदर नवगीत “हो गये रिश्ते कलंकित, लाज ने फाँसी चुनी है। शिष्टता की ओढ़नी भी आपदाओं ने बुनी है”सुनाकर सबको मनन करने पर विवश कर दिया।
काव्य संध्या में सभी कवियों ने एक से बढ़कर एक सशक्त एवं भावप्रवण रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
देश, समाज, नारी चेतना, प्रकृति, प्रेम तथा हिंदी भाषा के गौरव से संबंधित काव्य प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया।
विश्व हिंदी दिवस की सार्थकता
इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि संवेदना, संस्कृति और वैश्विक एकता की सशक्त अभिव्यक्ति है। ‘जीवन्ती’ संस्था का यह प्रयास हिंदी को जन–जन तक पहुँचाने की दिशा में एक सराहनीय एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।
संस्था की ओर से सभी अतिथियों, कवियों एवं साहित्य–प्रेमियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति और सक्रिय सहभागिता से यह आयोजन सफल, स्मरणीय एवं प्रेरक बना।