दैनिक रोड़वेज बसों को चारधाम में लगाना उत्तराखंड मूल के विरुद्ध – सुशील त्यागी

देहरादून ,

  • दैनिक रूटों पर चलने वाली दैनिक रोडवेज बसों को हटाकर इन्हें चारधाम यात्रा मार्ग पर भेजने के खिलाफ प्रबुद्ध नागरिकों ने आक्रोश व्यक्त किया।
  • सुशील त्यागी ने कहा की पहाड़ के यात्रियों के लिए आवागमन का मुख्य साधन ये बसे हैं। प्रदीप कुकरेती के अनुसार पहाड़ी मार्गों के 11 रूटों पर इन बस सेवाओं के बाधित होने से पहाड़ के लोगों को होने वाली कठिनाइयां उत्तराखंड राज्य की स्थापना की मूल भावना के विरुद्ध है।
  • जगमोहन मेंदीरत्ता के अनुसार राज्य का गठन इसलिए नहीं हुआ था की यात्रियों की सुविधाओं का खामियाजा पहाड़ के लोग ही चुकाएंगे। नरेश चंद्र कुलाश्री ने कहा उत्तराखंड परिवहन निगम को प्राइवेट कंपनियों से अनुबंध कर अतिरिक्त निजी बसों को यात्रा मार्ग पर लगाना चाहिए।
  • जगमोहन सिंह नेगी तथा गिरीश चंद भट्ट के अनुसार जब वीआईपी रेलियों, कुंभ,कावड़ आदि पर निजी बसें अधिग्रहीत की जा सकती हैं तो चार धाम के लिए भी यह संभव है।सुझाव दिया गया की उत्तर प्रदेश,हरियाणा,दिल्ली, राजस्थान के परिवहन विभागो से यात्रा काल के लिए बसें ली जानी चाहिए़। राजीव शर्मा का कहना था की उत्तराखंड के परिवहन मंत्री को भीषण गर्मी में जनमानस की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए नियमित बसों को पहाड़ी रूटों से नहीं हटाना चाहिए। जेएस नेगी के अनुसार सरकारी रैली या चारधाम यात्रा में रोडवेज बसों का प्रयोग बिल्कुल अनुचित है और जनविरोधी है। चार धाम यात्रा हेतु जीएमओ तथा केएम ओ से अतिरिक्त बसें लगाई जानी भी जरूरी बताई गई,जिससे रोडवेज बसों को पूर्व निर्धारित रूप से न हटाया जा सके।आक्रोशित जनों में जगमोहमसिंह नेगी,जगमोहन मेंदीरत्ता,नरेश चंद्र कुलाश्री,प्रदीप कुकरेती,राजीव शर्मा, गिरीश चंद्र भट्ट,सुशील त्यागी,सत्य प्रकाश चौहान,विकास त्यागी आदि हैं।