क्षमा वाणी जैन समाज में वीरों का गहना है कोई पाप नहीं । आज अपने द्वारा किए गए जाने अनजाने में कोई भी ऐसा कृत्य जो किसी के मन को ठेस पहुंचाए उसके लिए कोई क्षमा मांगकर शर्मिंदा नहीं होना चाहता । मात्र जैन समाज स्वयं क्षमा मांगकर अन्यों को सिख भी देता है कि अपनी गलती और दूसरों के जीवन को बचाने के लिए माफ़ी मांगने से कोई छोटा बड़ा नहीं होता । बल्कि मानवता की ये ही परिभाषा है ।