“रोशन हो हर दिल का मंदिर तो समझो दिवाली है ” ने खूब तालियां बटोरी
देहरादून,
जीवंती देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था व राष्ट्रीय कवि संगम ( गढ़वाल इकाई ) के संयुक्त तत्वावधान में कल एक राजेंद्र नगर स्थित गेस्ट हाउस में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया ।
गोष्ठी का शुभारंभ संस्था की अध्यक्षा श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ ने अपनी मधुर वाणी में माँ शारदा वंदना की प्रस्तुति से किया । गोष्ठी का संचालन संस्था की संयोजक श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ ने अत्यंत विधिवत एवं गरिमापूर्ण ढंग से किया।
इस अवसर की मुख्य अतिथि श्रीमती विजया बिष्ट जिनकी संवेदनशील दृष्टि, सक्रिय सामाजिक भूमिका और साहित्यिक अभिरुचि से पूरे उत्तराखंड में एक सम्मानित पहचान हैं। गोष्ठी अध्यक्षता श्री जी.के. पिपिल ने की ।
गोष्ठी में अनिल अग्रवाल (अध्यक्ष, राष्ट्रीय कवि संगम गढ़वाल इकाई),डॉ. इंदु अग्रवाल ,डॉ. विद्युत प्रभा चतुर्वेदी ‘मंजू’ (संरक्षिका, जीवन्ती परिवार), जसवीर सिंह ‘हलधर’, श्री शिव मोहन सिंह तथा विजय कुमार द्रोणी (संगठन मंत्री) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
काव्य संध्या में अनेक सुप्रसिद्ध कवि एवं रचनाकारों ने अपनी सृजनशील रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। उपस्थित रचनाकारों में मशहूर शायर जनाब अंबर खरबंदा, श्री विवेक बादल ‘बाजपुरी’, डॉ. विद्युत प्रभा चतुर्वेदी ‘मंजू’, श्री कुमार विजय द्रोणी, शिव मोहन सिंह, जी.के. पिपिल, जसवीर सिंह ‘हलधर’, श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’, श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’, डॉ. भारती मिश्रा, डॉ. क्षमा कौशिक, श्रीमती सिद्धि डोभाल, डॉ. प्रतिभा प्रकाश, श्रीमती संगीता वर्मानी ‘साध्या’, श्रीमती निकी पुष्कर, श्री सत्य प्रकाश शर्मा ‘सत्य’, श्रीमती स्वाति ‘मौलश्री’, श्रीमती वंदिता श्री, डॉ. ललित सिंह राणा, श्रीमती रमेश चंद्र, श्री नवीन आज़म, श्री अशोक शर्मा , श्री नवीन डोभाल तथा श्रीमती नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’ आदि ने काव्य पाठ किया ।
“अगर मिटे अँधियारा जग का तो समझो दीवाली है।
रोशन हो हर दिल का मंदिर तो समझो दीवाली है।” कविता बिष्ट ‘नेह’ की प्रस्तुति ने खूब वाहवाही लूटी ।
”तन का रोना सब सुनते हैं मन की आहें कौन सुने,
उजियारा सबको भाता है
अंधियारे की कौन गुने” कुमार विजय द्रोणी ने समा बांध दिया । ”जो एक दूसरे का दुःख ना समझें वो भाई क्या वो बहना क्या भले उपहारों का लेन देन ना हो दिल मिले रहें तो कहना क्या’”जी के पिपिल ने भाई बहन के रिश्तों पर जोर दिया ।”मै समय की बेटी हूं संघर्ष मेरा श्रंगार है।” डॉ भारती की भावपूर्ण रचना ने सभी को भाव विभोर कर दिया।
मौजूदा कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भावना, विचार और कला की ऐसी छटा बिखेरी कि पूरा सभागार काव्य-रस में डूब गया। हास्य, व्यंग्य, ओज, श्रृंगार और करुण सभी रसों की झंकार इस संध्या में गूँजती रही।
मुख्य अतिथि श्रीमती विजया बिष्ट जी ने अपने उद्बोधन में संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए कवियों की साधना को नमन किया और सभी को स्नेहाशीष प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में संस्था की अध्यक्षा श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ एवं महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा ने सभी अतिथियों, कवियों और सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।