देश के प्रधानमंत्री के नाम अपने स्कूल को बचाने हेतु नन्हे बच्चों का खुला पत्र
विषय: बिना पूर्व सूचना के डीआरडीओ (DRDO) द्वारा संचालित रक्षा अनुसंधान विद्यालय का निजीकरण करने और छात्रों एवं शिक्षकों के भविष्य को संकट में डालने के संबंध में।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम।
मेरा नाम प्रत्युष भूषण शर्मा है। मैं रक्षा अनुसंधान विद्यालय में कक्षा ६ का छात्र हूँ। यह स्कूल पिछले ३० वर्षों से डीआरडीओ द्वारा संचालित और सीबीएसई से संबद्ध था। मैं कक्षा १ से इसी विद्यालय में पढ़ रहा हूँ।
आज सुबह जब मैं और मेरे सहपाठी स्कूल पहुंचे, तो हम सभी स्तब्ध रह गए। रातों-रात हमारे स्कूल के गेट पर डीएवी (DAV) पब्लिक स्कूल का बोर्ड लगा दिया गया था। बिना किसी पूर्व सूचना के गेटकीपर से लेकर प्रिंसिपल सर और सभी पुराने शिक्षकों को बदल दिया गया। यह अचानक हुआ बदलाव हम सभी बच्चों और हमारे अभिभावकों के लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं है।
हमारे स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे मध्यम या निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं। हमारे माता-पिता के लिए डीएवी जैसे महंगे प्राइवेट स्कूल की फीस भर पाना नामुमकिन है। इसके अलावा, जो शिक्षक पिछले २८-३० वर्षों से इस स्कूल का हिस्सा थे और जो हमारे लिए परिवार की तरह थे, उन्हें भी बिना बताए हटा दिया गया। इस फैसले से लगभग १५० बच्चों का भविष्य और उनका दिल टूट गया है।
जब हमारे अभिभावकों ने डीआरडीओ के डायरेक्टर से बात की, तो उनका कहना था कि डीआरडीओ के पास फंड की कमी है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी, देश के बच्चों का यह बाल मन पूछना चाहता है कि क्या देश की इतनी बड़ी रक्षा अनुसंधान संस्था के पास एक छोटे से स्कूल को चलाने का फंड नहीं है? जहाँ एक तरफ सरकार देश भर में नए स्कूल खोलने का दावा करती है, वहीं एक अच्छा-खासा चलता हुआ स्कूल बंद कर प्राइवेट हाथों में सौंप दिया गया।
मैं भारत का आने वाला भविष्य हूँ। क्या मेरा यह छोटा सा स्कूल बंद करके या उसे प्राइवेट कर देने से सरकार का बहुत सारा पैसा बच जाएगा? मुझे और मेरे जैसे १५० बच्चों को हमारे पुराने स्कूल का वही स्नेहिल माहौल और हमारे पुराने शिक्षक वापस चाहिए।
मुझे पूरा विश्वास है कि आप एक छोटे बच्चे के मन की इस व्यथा को समझेंगे और हमारे स्कूल को बचाने में हमारी मदद करेंगे।
भवदीय,
प्रत्युष भूषण शर्मा
कक्षा – ६, रक्षा अनुसंधान विद्यालय